व्यंग्य अमरीका में हिंदी

व्यंग्य

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला सम्मेलन / डॉ कीर्ति काले 

वैधानिक चेतावनी - इस व्यंग्य लेख के सारे पात्र और उनके नाम काल्पनिक हैं। मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति,धर्म,सम्प्रदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं है। कृपया पोस्ट ग्रेजुएट से कम क्वालिफिकेशन रखने वाले पाठक इसे न पढ़ें।

मोबाइल की घण्टी बजी। फोन उठाया तो 
भारी सी आवाज आई :- हैलो
मैं प्रगतिशील महिला मंच की प्रेसिडेंट मिस खुर्राट खटाखट।आप ?
मैंने अपना नाम बताया तो मिस खुर्राट खटाखट अपनी आवाज किंचित नरम करके बोलीं नमश्कार। मैंने थोड़ी देर पहले फोन किया था। आपने उठाया नहीं। इस बार भी नहीं उठातीं तो ये गोल्डन अपॉर्चुनिटी आपके हाथ से निकल जाती। मैंने पूछा कैसी अपॉर्चुनिटी? उन्होंने बताया कि हम प्रगतिशील महिला मंच की ओर से इस महीने के अंतिम सप्ताह में सोसाइटी के डिफरेंट क्लासेज से इम्पोर्टेंट लेडीज का ग्राण्ड शो ओर्गेनाइज कर रहे हैं।आप हिंदी लेंग्वेज की फेमस पोएटेस हैं।हम चाहते हैं कि आप इस प्रोग्राम को अटैंड करें।
मैंने अभ्यासवत पूछा इस शो में कौन-कौन आ रहे हैं? खुर्राट खटाखट बोलीं लिस्ट तो लम्बी है पर अभी पहला फोन आपको ही किया है।आपकी स्वीकृति मिलने पर हम आगे बढ़ेंगे। वैसे फिल्म, खेल, लिटरेचर, पोलीटिक्स, सोशल नेटवर्किंग, मीडिया सभी की प्रमुख लेडीज को बुलाया जाएगा। मैं समझ गई कि खुर्राट खटाखट वास्तव में घुटी घुटाई खुर्राट हैं।जरा भी खुलने को राजी नहीं। मैंने डायरेक्ट ही पूछ लिया:- मैं दिल्ली से आऊंगी।आने जाने में समय और धन दोनों लगेंगे।आप पेमेंट क्या करेंगी? पेमेंट का नाम सुनते ही जैसे खुर्राट खटाखट फर्राट फटाफट हो गईं। बिफरते हुए बोलीं ये कवि सम्मेलन नहीं है।समाज सेवा का काम है।इट्ज वैरी प्रैस्टीजिअस। फिर भी हम आपको आने जाने का फेयर, रहने खाने की व्यवस्था के साथ शॉल, और मोमेंटो देंगे।आप आईए तो।आपको अच्छा लगेगा। मैंने और खोदकर पूछा इसके अलावा और कुछ नहीं? वो बोलीं।आप आईए तो हम देख लेंगे। बड़ी बड़ी हस्तियां आ रही हैं। किसी ने हमसे कुछ नहीं पूछा। और आप हैं कि…...।
हमने भी सोचा अलग तरह का कार्यक्रम है।चलना चाहिए। वैसे भी कवि सम्मेलनों का अॉफ सीजन है।ये सोचकर हाँ कर दी।
अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला मंच का वार्षिक सम्मेलन मेट्रो सिटी के सेवन स्टार होटल में होना था।सो हम अपनी महंगी महंगी साड़ियां छाँटकर ले गए। और क्या। हिन्दी की बिन्दी का सवाल था।
अपनी राष्ट्र भाषा के सम्मान का खयाल था
। जैसे ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो सच बताएं वहाँ की लकदक सजावट और इधर उधर घूमती न्यून वस्त्र धारिणी इंग्लिश में गिटराती पिटराती लिपी पुती बालाओं को देखकर कुछ मिनटों के लिए तो हम चकराएमान हो गए। हमें लगा जैसे हम गलती से इस हॉल में आ गए हैं। यहाँ प्रगतिशील महिलाओं जैसा नहीं फैशन शो जैसा माहौल है। उहापोह में थे कि रुकें या बाहर हो लें तभी पहचानी सी एक सुन्दरी दिखाई दी। फिर दो तीन और दिखीं तब तसल्ली हुई कि यह प्रगतिशील महिला सम्मेलन ही है।जैसे तैसे अपने को हाईली अपर क्लास महौल में एडजस्ट कर पाए।मिस खुर्राट खटाखट अत्यन्त आत्मीय एटिकेट्स के साथ मिलीं।कई महान प्रगतिशील महिलाओं से मेरी हाय हैलो कराई।हाई टी के पश्चात मुख्य कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ।संचालिका ने मंचासीन विशिष्ट प्रगतिशील महिलाओं का क्रमवार परिचय कराया ।
मंच पर बीचोबीच बैठीं हैं डोकरी इंडस्ट्रीज की सीईओ नखशिख सजावट की टोकरी मिस छोकरी डोकरी। संस्था की पूर्व प्रेसिडेंट हैं।
  हमारा इनके साथ पुराना अटेचमेंट है।
मिस छोकरी डोकरी जी प्रारम्भ से ही अत्यन्त प्रगतिशील रही हैं।
इन्होंने लाइफ में हमेशा अपने सपनों को ही महत्व दिया। जो भी किया अपने दम पर किया। 
हमेशा कैरियर को परिवार से पहले रखा इसीलिए सफलता के साथ साथ अनेक पुरस्कारों सम्मानों का स्वाद चखा। 
सड़े गले रिश्तों को ढोने की बजाय उन्हें झटककर अलग कर देना इन्हें उचित लगा। इसी कारण इनका भाग्य जगा।
जितना भी जीया, अपने लिए जीया।
दो शादियाँ ,दो डाइवोर्स,चार खुले अफेयर्स इतनी बड़ी आपकी थाती है । संक्षिप्त में बताएं तो आप हमारी रोल मॉडल की श्रेणी में आती हैं।
इस सम्मेलन का आधा खर्च उठाने के लिए आपका तहे दिल से आभार।
  लीजिए सम्मान का एक गुलाब कीजिए स्वीकार।
छोकरी डोकरी जी के दाहिनी ओर विराजमान हैं प्रसिद्ध समाजसेविका आदर्श झाड़ूवाला।इनका जैसा नाम है वैसा ही काम है।समाज में फैली बुराईयों को अपनी प्रगतिशील सोच की झाड़ू से साफ करने में सचमुच ये हमारी आदर्श हैं।
हमारे कार्यक्रम की मुख्य अतिथि हैं इस बात का हमें अत्यंत हर्ष है।
महिलाओं पर अत्याचार होने की खबर आने से पहले ही मिसेज झाड़ूवाला भविष्य में होने वाली घटना के स्थल पर अपनी टीम के साथ पहुँच जाती हैं। 
घटनाएँ तो इनके पीछे पीछे आती हैं। अभी तक इण्डिया गेट पर इनके नेतृत्व में हजारों मोमबत्तियां जल बुझ चुकी हैं। लेकिन मिसेज झाड़ूवाला यहीं तक नहीं रुकी हैं।
हम आप जैसी प्रगतिशील महिला को मुख्य अतिथि के रूप में पाकर हो गए हैं धन्य।
आप तो आप हैं आप जैसा नहीं है कोई अन्य।
आज के सम्मेलन में अतिथियों के ठहरने के लिए होटल का पूरा खर्चा इन्हीं के सौजन्य से है।इनके लिए बनती हैं ज़ोरदार तालियाँ।
स्वागत के लिए आएं मिसेज कालिया।
अब एक ऐसी मेहमान से आपको परिचित कराती हूँ जिन पर इस हॉल में बैठी प्रत्येक प्रगतिशील महिला की नजरें टिकी हुई हैं। जी हाँ ठीक पहचाना वही जिनकी मुस्कान तक बिकी हुई है। 
टीवी के सभी चैनलों पर छोटे बड़े सभी न्यूज पेपर्स में आपने इन्हें देखा होगा। वैलकम कीजिए जमकर।
वन एण्ड ओनली मिसेज छलाविका डम्पर ।ये पहले लक्ष्य निर्धारित करती हैं। फिर उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तन मन धन सब लगा देती हैं।साम,दाम , दण्ड,भेद कुछ भी नहीं छोड़ती हैं 
और जिसके सहारे ऊपर चढ़ती हैं उस सीढ़ी को सबसे पहले तोड़ती हैं।
हमारे आज के कार्यक्रम के टीवी कवरेज की जिम्मेदारी डम्पर जी ने ही उठाई है।
डम्पर जी हमारी ओर से आपको हार्दिक बधाई है।
आलीशान ठण्डे सभागार में बैठीं प्रगतिशील सदस्याओं का अन्य की प्रशंसा सुनने का कोटा अब पूरा हो चुका था।हम किसी से कम हैं क्या?और कितना सुनें? का भाव मन में लिए फाउन्डेशन की मोटी पर्त अपनी सम्पूर्ण देह पर चढ़ाए,नकली पलकें, भौंहें और न जाने क्या क्या नकली चिपकाए हीरों के जेवरों से लदी फदी पुरानी इत्र की शीशियाँ हॉल में यहाँ वहाँ घूमकर सेल्फी लेने के बहाने तरह तरह के पोज बनाते हुए अपनी बिछुड़ती हुई जवानी को पकड़ने का प्रयास करने लगीं।
संचालिका बोली प्लीज़ बैठ जाईए।ये कार्यक्रम अधिक लम्बा नहीं चलने वाला।आपको सैल्फी लेने का पूरा समय मिलेगा। लेकिन वक्त कब किसके लिए रुका था ।अब तक तो चाऊमीन का एक एक चाऊ आई मीन नूडल बिखर चुका था ।स्थिति बिगड़ती देखकर माइक खुर्राट खटाखट जी ने सम्हाला। हमारे बीच हिन्दी लैंग्वेज की फेमस पोएटेस आई हुई हैं।अब हम उनकी कविताएं सुनना चाहेंगे।ध्यान रहे डिनर कार्यक्रम के बाद ही खुलेगा। 
कविता सुनने पर ही ड्रिंक्स और खाना मिलेगा।
अचानक आमंत्रित किए जाने पर थोड़ा अचकचा तो गए हम लेकिन पहले भी ऐसे अनेक अवसरों को झेल झेलकर पक्के हो चुके थे हमने भी लगा दिया पूरा दम। 
चढ़ जा बिटिया सूली पर वाला भाव लिए पहुँच गए माइक पर ।
सबसे पहले देशभक्ति की जोशीली कविता प्रारम्भ की यह सोचकर 
कि बड़े बड़े कवि सम्मेलनों में इस कविता ने बिगड़े माहौल को बना दिया है सो यहाँ भी ऐसा ही करिश्मा होगा। लेकिन ये प्रगतिशील महिलाओं का सम्मेलन था पासा उल्टा पड़ गया। 
हमारा सारा जोश जमीन में गड़ गया श्रोताओं में बैठी एक प्रोफेसर ने उठकर जोर से अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इतनी लुगाईयों के सामने हमारी इज्जत मिट्टी में मिलाई।
कहा कि ये कार्यक्रम प्रगतिशील महिलाओं के लिए है। इसमें केवल महिलाओं से ही सम्बन्धित बातों का दौर चलेगा।
  देश भक्ति और वीर रस का पौधा यहाँ नहीं फलेगा। 
मैंने महिलाओं से सम्बन्धित एक हास्य रस की कविता उठाई तो प्रोफेसर की असिस्टेंट ने टांग अड़ाई। 
महिलाओं की दारुण स्थिति से हम सब रोने को आ रही हैं 
और आप हैं कि हास्य रस की कविता सुना रही हैं?
उनकी बात का न चाहते हुए भी रखा मान और हमने पूरे आत्मविश्वास के साथ सुनाना प्रारम्भ किया बेटियों की दयनीय स्थिति पर आधारित अपना अत्यन्त जमाऊ कारुणिक गान। 
इस गीत में छुपी हजारों श्रोताओं की आँखों से आँसुओं की झमाझम बरसात कराने की अभूतपूर्व क्षमता की परीक्षा कई बार हम कवि सम्मेलनों में कर चुके थे।
इसे सुनकर महिलाओं के तो क्या पुरुषों के भी गले नाक तक भर चुके थे।
भाव में अभिनय का तड़का लगाकर गाना शुरू कर दिया।एक अन्तरा ही गाया था कि आँखों पर मोटा चश्मा चढ़ाए,कलफदार साड़ी की अकड़ को बरकरार रखे समानान्तर सिनेमा की डायरेक्टर खड़ी हो गईं।
उनके खड़े होते ही उनकी चेलियाँ भी बड़ी हो गईं। 
कलफदार साड़ी अकड़ते हुए गरजी - बन्द करो ये सब पुरातनपंथी गाना।
बेटियाँ कब तक रोती रहेंगी।अब बेटियां हाईली क्वालिफाइड हैं।आज के दौर में शादी,बिदाई सब फाल्तू के झंझट हैं।बदल गया है जमाना।
लिव इन रिलेशनशिप के समय में इतनी पिछड़ी सोच ?
उनकी गर्जना सुनकर हमारे गले में आ गई मोच।
कवयित्री जी आपने अपनी लाइफ में कोई स्ट्रगल नहीं किया है। शादी की,बच्चे पाले, कविता लिखी बस। 
सब कुछ पिछड़ा जस का तस।
बन्धनों से मुक्ति का एक भी नहीं किया प्रयास । 
बुरा मत मानिए लेकिन प्रगतिशील होने का आपको जरा भी नहीं है अभ्यास।
मिसेज छोकरी डोकरी जी को देखिए दो शादियां,दो डाइवोर्स, चार खुले अफेयर्स । इन्होंने अपनी प्रगतिशील सोच को अगली पीढ़ी तक भी पहुँचाया 
है 
इसीलिए अपनी बेटी का लव मैरिज कराकर डाइवोर्स करवाया है।
इतनी बड़ी क्वालिफिकेशन है । इसलिए हर क्षेत्र में प्रमोशन ही प्रमोशन है। 
और आप?
पिटी पिटाई लकीर पीट रही हैं।
एक शादी को ही अब तक घसीट रही हैं।
स्टॉप दिस नॉनसेंस।
मामला हो गया गम्भीर । वातावरण हो गया टैंस।
इधर हिन्दी कविता की राजकुमारी, महादेवी वर्मा की परम्परा की कवयित्री अपमानित होकर रुंआसी सी मंच से नीचे उतर रही थी 
उधर 
खुर्राट खटाखट
छोकरी डोकरी,झाड़ूवाला और मिसेज डम्पर के साथ सैल्फी लेने में तल्लीन आत्ममुग्धता के नशे से भर रही थीं।
हमने भी सोचा बच्चू कच्ची गोलियां हमने भी नहीं खेली हैं। ये तुम्हारी गली है, तुम्हारी बारी है । 
सम्हलकर रहना अपनी गली के कवि सम्मेलन में बुलाकर तुम्हारी तथाकथित प्रगतिशीलता को असली औकात दिखाने की हमारी भी पूरी तैयारी है।

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डॉ कीर्ति काले